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परिवार नियोजन के लिए महिलाओं की पहली पसंद बना अंतरा इंजेक्शन

लगवाने के तुरंत बाद से ही प्रभावी हो जाता है अंतरा इंजेक्शन : नोडल अधिकारी

 

संजय सोनी की रिपोर्ट

अलीगढ़। परिवार नियोजन के प्रति समुदाय में जागरूकता बढ़ी है | परिवार नियोजन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे ‘बास्केट ऑफ़ च्वाइस’ में महिलाओं की पहली पसंद बन चुका है त्रैमासिक गर्भ निरोधक इंजेक्शन अन्तरा | इसे साबित करते हैं पिछले दो वर्ष के आंकड़े, वित्तीय वर्ष 2021-22 में अप्रैल से अक्टूबर तक जहाँ 6,180 महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन को अपनाया वहीँ वित्तीय वर्ष 2022-23 में अप्रैल से अक्टूबर तक 9,684 महिलाओं ने अंतरा को चुना है | इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 3504 अधिक महिलाओं ने इसे अपनी पहली पसंद बनाया है ।

अंतरा अपनाने वाली ब्लाक गोंडा निवासी 28 वर्षीया दर्शनी देवी का कहना है कि दो बच्चों के जन्म में पर्याप्त अंतर रखने के लिए मुझे गर्भनिरोधक साधन की बहुत ही आवश्यकता थी। इसलिए पति ओमवीर सिंह से बातचीत करके अंतरा इंजेक्शन अपनाने का फैसला लिया। उनका कहना है कि इससे पहले भी माला-एन गर्भनिरोधक टेबलेट ली थी। आशा कार्यकर्ता ने बताया कि सरकार द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इसकी सेवा उपलब्ध है। सीएचसी गोंडा पर मैंने अंतरा इंजेक्शन की तीन डोज लगवाई। गांव में सीएचसी की दूरी काफी ज्यादा थी। आशा ने बताया कि नथावरी सब सेंटर पर भी अंतरा इंजेक्शन की सेवा शुरू हो चुकी है।

बाकी नौ अंतरा इंजेक्शन की डोज निथावरी उपकेंद्र पर ही लगवाएं । उन्होंने कहा कि प्रत्येक डोज लगवाने पर विभाग द्वारा सौ रुपए भी मिले उनका कहना है कि अंतरा इंजेक्शन लगवाने से किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं हुई। इसके प्रति अब पचवरी क्षेत्र की महिलाओं को जागरूक भी करती हूँ। उन्हें यह भी बताती हूं कि दो बच्चों के जन्म में अंतर रखने के लिए यह सबसे बेहतर व सुरक्षित तरीका है।

पचवरी क्षेत्र में निथावरी उपकेंद्र पर तैनात कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) विष्णु ने बताया कि गर्भनिरोधक अंतरा इंजेक्शन के बारे में महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह इंजेक्शन तीन महीने तक गर्भधारण से सुरक्षित बनाता है। महिलाएं यह इंजेक्शन माहवारी के शुरू होने के सात दिन के अंदर, प्रसव होने के छह सप्ताह बाद, गर्भपात के तुरंत बाद या सात दिन के अंदर लगवा सकती हैं।

उन्होंने कहा – कि शुरूआती दौर में महिलाएं माहवारी के दौरान अधिक रक्तस्राव के चलते इंजेक्शन लेने से घबराती हैं। जब उन्हें समझाया जाता है कि माहवारी में अधिक रक्तस्राव, इंजेक्शन का नहीं, बल्कि यह सिर्फ हार्मोनल असर है, जो हानिकारक नहीं हैं। उसके बाद महिलाएं तैयार हो जाती हैं। इसके साथ ही पहली बार अंतरा इंजेक्शन लगवाने वाली महिला को दो बच्चों के जन्म के बीच पर्याप्त अंतर रखने के फायदे भी समझाए जाते हैं।

नोडल अधिकारी ने बताया कि परिवार नियोजन के प्रति समुदाय को जागरूक करने के साथ ही स्थायी व अस्थायी साधनों, की सेवाएं स्वास्थ्य विभाग प्रदान कर रहा है। स्थायी विधि में नसबंदी है, जबकि अस्थाई विधि में कॉपर टी, त्रैमासिक गर्भनिरोधक अंतरा इंजेक्शन, माला डी, माला-एन आदि की सुविधा उपलब्ध है।

उन्होंने बताया कि त्रैमासिक अंतरा इंजेक्शन लगवाने के तुरंत बाद प्रभावी हो जाता है। लंबे समय से गर्भ से बचाव के लिए इसे हर तीन महीने पर लगवाना होता है। यह सेवा शुरू करने से पहले प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा जांच करवाना आवश्यक है । उनका कहना है कि अंतरा इंजेक्शन का पूरा नाम मेड्रोक्सी प्रोजेट्रॉन एसिटेट है । यह महिलाओं के लिए सरल, सुरक्षित और तिमाही गर्भनिरोधक इंजेक्शन है। इसमें लाभार्थी की गोपनीयता सुनिश्चित की जाती है। जो महिलाएं गर्भनिरोधक गोली नहीं खा सकती हैं वे इस विधि का इस्तेमाल कर सकती हैं।

57 प्रतिशत महिलाओं की अंतरा के प्रति बढ़ी रुझान :

वित्तीय वर्ष 2021-22 में अप्रैल से अक्टूबर माह तक 6,180 महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन लगवाए। वर्ष 2022-23 में अप्रैल से अक्टूबर तक 9,684 महिलाओं ने अंतरा के प्रति रुचि दिखाई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 3,504 अधिक महिलाओं यानि 57 प्रतिशत अधिक महिलाओं का अंतरा के प्रति रुझान बढ़ा है।

 

-हर डोज पर 100 रुपये प्रोत्साहन राशि :

वरिष्ठ परिवार नियोजन विशेषज्ञ ने बताया कि त्रैमासिक गर्भनिरोधक अंतरा इंजेक्शन का लाभ लेने वाली महिला को प्रति डोज लगवाने पर 100 रुपये की प्रोत्साहन राशि विभाग की ओर से दी जाती है। महिला के साथ आशा को भी प्रति डोज 100 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

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